यहाँ शाकाहारी रहना उतना मुश्किल नहीं जितना लोग बताते हैं, लेकिन थोड़ी तैयारी ज़रूर चाहिए। कुछ साल की कोशिशों के बाद जो समझ आया, वो लिख रहा हूँ।
सबसे बड़ी बात जो शुरू में मुझे पता नहीं थी: सब्ज़ी वाला दिखने वाला खाना भी अक्सर मछली के शोरबे के साथ बनता है। सूप, सॉस, यहाँ तक कि कुछ नाश्तों में भी। इसलिए सिर्फ मेन्यू देखकर अंदाज़ा लगाना काफ़ी नहीं है। यह बात मुझे काफ़ी देर से पता चली।
मैंने क्या किया:
पहला, एक छोटा वाक्य याद कर लिया जिसमें मैं पूछ सकूँ कि इसमें मांस या मछली का शोरबा है या नहीं। फ़ोन में लिखकर भी रखा है, ताकि शोर वाली जगह पर दिखा सकूँ। ज़्यादातर लोग बुरा नहीं मानते, बल्कि ध्यान से जवाब देते हैं और कभी-कभी खुद ही कोई दूसरा विकल्प बता देते हैं।
दूसरा, कुछ जगहें तय कर लीं जहाँ मुझे पक्का पता है कि क्या खा सकता हूँ। रोज़ नई जगह ढूँढना थका देता है। अब जब सहकर्मियों के साथ बाहर जाना होता है तो मैं ही सुझाव दे देता हूँ, इससे किसी को असहज भी नहीं होना पड़ता।
तीसरा, घर पर बनाना सीख लिया। शुरू में मसाले ढूँढने में दिक्कत हुई, पर निशि-कासाई की तरफ़ की दुकानों में लगभग सब कुछ मिल जाता है। एक बार जाकर महीने भर का सामान ले आता हूँ।
चौथा, दालों को लेकर उम्मीदें थोड़ी बदलनी पड़ीं। जो किस्में आसानी से मिलती हैं वो घर वाली से थोड़ी अलग हैं, लेकिन आदत पड़ जाती है। मैंने अब स्थानीय चीज़ों से ही काम चलाना सीख लिया है, और कुछ नए मेल अच्छे भी लगे।
एक बात और: दोस्तों को पहले से बता देना बेहतर रहता है। पहले मैं संकोच करता था, फिर एक बार खाने की मेज़ पर अजीब स्थिति बन गई। अब मैं पहले ही कह देता हूँ, और किसी को कोई दिक्कत नहीं होती।
जो लोग यहाँ शाकाहारी हैं, आप कैसे मैनेज करते हैं? कोई अच्छी जगह पता हो तो ज़रूर बताइए।
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