यहाँ आए हुए कुछ साल हो गए हैं, और अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि पहले साल की बहुत सी परेशानियाँ टाली जा सकती थीं। इसलिए सोचा कि जो सीखा वो लिख दूँ, शायद किसी नए आए व्यक्ति के काम आ जाए।
सबसे पहले, कागज़ी काम की मात्रा। मुझे लगा था कि वीज़ा मिल गया तो काम खत्म। असल में यहाँ पहुँचने के बाद भी कई जगह जाना पड़ता है, और हर जगह अलग दस्तावेज़ माँगे जाते हैं। मैंने एक फोल्डर बनाया जिसमें हर काम की कॉपी रखता गया, और यह आदत बाद में बहुत काम आई। एक बार तो वही पुरानी कॉपी काम आ गई जब मुझे कुछ जल्दी में दिखाना था।
दूसरी बात, भाषा। मैं सोचता था कि ऑफिस में अंग्रेज़ी चलेगी तो बाकी भी चल जाएगा। ऑफिस में सच में दिक्कत नहीं हुई, लेकिन बाहर की ज़िंदगी अलग है। बैंक, अस्पताल, नगरपालिका का दफ़्तर, ये सब जापानी में ही होता है। थोड़ा-थोड़ा सीखना शुरू किया तो रोज़ की चीज़ें आसान होने लगीं। अब भी बहुत अच्छा नहीं बोलता, पर काम चल जाता है।
तीसरी बात जो मुझे हैरान कर गई, वो थी अकेलापन। काम मिल गया, घर मिल गया, फिर भी कुछ महीने बहुत खाली लगे। पीछे मुड़कर देखूँ तो सबसे बड़ी मदद उन लोगों से मिली जो पहले से यहाँ रह रहे थे। किसी से बात कर लेने भर से बहुत फर्क पड़ता है।
कुछ छोटी बातें जो काम आईं:
घर के पास वाली दुकानों के खुलने और बंद होने का समय याद कर लें। शुरू में मैं देर से पहुँचकर कई बार खाली हाथ लौटा।
कूड़ा अलग करने के नियम यहाँ गंभीरता से लिए जाते हैं। पड़ोसियों से पूछ लेना सबसे आसान तरीका है, और बात शुरू करने का बहाना भी बन जाता है।
डॉक्टर के पास जाने से पहले लक्षण लिखकर ले जाएँ। बोलकर समझाना मुश्किल होता है, कागज़ दिखाना आसान।
अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है, लेकिन अब घबराहट नहीं होती। जो लोग नए आए हैं, उनसे यही कहूँगा कि पहला साल सबसे भारी होता है, उसके बाद हल्का लगने लगता है।
आप लोगों को शुरू में सबसे ज़्यादा किस चीज़ ने परेशान किया था?
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